हिंदू पंचांग के अनुसार, 20 नबंवर से मार्गशीर्ष मास यानि अगहन मास का आरंभ हो चुका है, यह मास 19 दिसंबर 2021 तक रहेगा। हिन्दी कैलंडर के अनुसार यह वर्ष का नवां महीना है।

मार्गशीर्ष माह में मृगशिरा नक्षत्र होता है इसलिए इसे मार्गशीर्ष कहा जाता है। हिन्दू धर्मशास्त्रों में मार्गशीर्ष मास की विशेष महिमा बताई गई है। मार्गशीर्ष मास को सभी मासों में उत्तम और पवित्र तथा विशेष पुण्यदायी माना गया है। मार्गशीर्ष मास में भगवान कृष्ण की उपासना करने का विशेष महत्व माना गया है। श्रीमद भागवत पुराण और स्कंद पुराण में भी मार्गशीर्ष मास के महत्व को बताया गया है। पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय शंख भी प्रकट हुआ था। विष्णु पुराण के अनुसार देवी महालक्ष्मी समुद्र की पुत्री है और शंख को लक्ष्मी का भाई माना गया है। इन्हीं कारणों से शंख की पूजा भक्तों को सभी सुख देने वाली गई है। ऐसी मान्यता है कि यदि मार्गशीर्ष मास में शंख का पूजन किया जाए और यह उपाय किए जाएं तो सभी प्रकार के ग्रह-दोषों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं शंख की पूजा किस मंत्र से की जानी चाहिए और इससे जुड़े उपाय क्या हैं-

शंख की पूजन विधि

    अगहन मास में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करें।
    स्वच्छ वस्त्र धरण करने के बाद घर के मंदिर में एक चौकी बिछाएं।
    उस चौकी पर एक पात्र में शंख रखें।
    अब उसे कच्चे दूध और जल से स्नान कराएं।
    स्वच्छ कपड़े से उसे पोंछें और फिर दीया जलाएं।
    अब शंख पर दूध-केसर के मिश्रित घोल से श्री लिखें तथा उसे चांदी के पात्र में स्थापित कर दें।
    कुमकुम, अक्षत अर्पित करके सफेद पुष्प चढ़ाएं।

शंख पूजा मंत्र
अगहन मास में निम्न मंत्र से शंख पूजा करनी चाहिए।
त्वं पुरा सागरोत्पन्न विष्णुना विधृत: करे।
निर्मित: सर्वदेवैश्च पाञ्चजन्य नमोఽस्तु ते।
तव नादेन जीमूता वित्रसन्ति सुरासुरा:।
शशांकायुतदीप्ताभ पाञ्चजन्य नमोఽस्तु ते॥

शंख के पूजन के साथ अगर आप पितृदोष को दूर करना चाहते हैं तो अपने पानी पीने के स्थान पर दक्षिणवर्ती शंख में गंगजलल भर कर स्थापित करें। इसके अलावा आप शुक्र दोष से पीड़ित हैं तो एक सफेद कपड़े में सफेद शंख, चावल व बताशे लपेटकर नदी में बहाएं।